सनी देओल

सनी देओल के 55 करोड़ क़र्ज़ के मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ हुए सख़्ती के बाद, वह नरम पड़ सकते हैं क्योंकि कई कारण हो सकते हैं:

  1. समझौता: समय के साथ, दो पक्ष वायदा कर सकते हैं और समझौता कर सकते हैं ताकि मामले को सुलझा सकें।
  2. विधिक कदम: एक विधिक कदम यानी क़र्ज़ की मांग का विरोध या क़र्ज़ के ख़िलाफ़ क़ानूनी कदम उठाने की बजाय, समझौते का आग्रह कर सकता है।
  3. आर्थिक स्थिति: सनी देओल की वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है, जिससे उन्हें क़र्ज़ चुकाने की सामर्थ्य मिल सकती है।
  4. समाजिक दबाव: सार्वजनिक दबाव के चलते भी, किसी क़र्ज़ के मामले में समझौता करने का फ़ैसला किया जा सकता है ताकि समाज में उनकी छवि पर कोई बुरा प्रभाव न डाले।

यह सभी कारण हो सकते हैं जिनके कारण सनी देओल ने बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ समझौता करने का फ़ैसला लिया हो।

सनी देओल का बंगला नीलाम सनी देओल

अभिनेता और बीजेपी सांसद सनी देओल इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं. इसकी अकेली वजह फिल्म गदर-2 की सफलता नहीं है बल्कि बैंक ऑफ बड़ौदा का वो नोटिस भी है, जिसमें सनी देओल के मुंबई स्थित बंगले को नीलाम करने की बात कही गई.

बैंक ने कहा कि पंजाब के गुरदासपुर से सांसद सनी देओल दिसंबर 2022 से बैंक ऑफ़ बड़ौदा के ₹55.99 करोड़ के क़र्ज़ का भुगतान नहीं कर रहे हैं, इसलिए उनके गिरवी रखे बंगले की ई-नीलामी की जाएगी.

19 अगस्त को जब यह नोटिस अख़बारों में छपा तो सनी देओल से क़र्ज़ न चुकाने को लेकर लोग सवाल करने लगे. उन्होंने इसे व्यक्तिगत मामला बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

हालांकि दो दिन बैंक ऑफ बड़ौदा ने ‘तकनीकी कारणों’ का हवाला देते हुए यह नोटिस वापस ले लिया.

सवाल है कि आख़िर बैंक ने ऐसा क्यों किया? क्या सनी देओल अपना क़र्ज़ चुकाने के लिए तैयार हैं? क्या बैंक पर कोई दबाव डाला गया? बैंक ने जो कारण बताए, उनमें कितना दम है?

क्या है पूरा मामला

अभिनेता सनी देओल ने बैंक ऑफ बड़ौदा से मुंबई के जुहू स्थित ‘सनी विला’ बंगले पर एक लोन लिया था.

इस लोन में भाई बॉबी देओल और पिता धर्मेंद्र सिंह गारंटर बने थे, इसके अलावा ‘सनी साउंड प्राइवेट लिमिटेड’ को कॉर्पोरेट गारंटर बनाया गया था.

मनी कंट्रोल न्यूज वेबसाइट के मुताबिक उन्होंने यह लोन साल 2016 में एक फिल्म को फाइनेंस करने के लिए लिया था.

2019 लोकसभा चुनाव के समय चुनाव आयोग को दिए एफिडेविट में भी सनी देओल ने बताया था कि उन्होंने करीब 50 करोड़ रुपये का लोन लिया हुआ है.

लोन को समय से न चुकाने के चलते बैंक ने दिसंबर, 2022 के आख़िर में इसे नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) घोषित कर दिया.

सनी देओल का बंगला नीलाम

बैंक ने क्या किया?

बैंक ऑफ बड़ौदा ने अपने रुपये रिकवर करने के लिए सनी देओल के उस बंगले को बेचने का फ़ैसला किया जो उन्होंने गिरवी रखा था.

बैंक ने 19 अगस्त, 2023 को कई अख़बारों में नोटिस जारी कर बताया कि सनी देओल पर करीब 56 करोड़ रुपये और दिसंबर 2022 के बाद से इस रक़म पर लगने वाला ब्याज बकाया है, जिसे रिकवर करने के लिए वह बंगले को नीलाम करने जा रहा है.

नीलामी के लिए बंगले का बेस प्राइस 51 करोड़ 43 लाख और तारीख, 25 सितंबर, 2023 रखी गई. बैंक ने इच्छुक ख़रीदारों से बेस प्राइस का दस प्रतिशत जमा कर ऑनलाइन होने वाली नीलामी में हिस्सा लेने को कहा.

नोटिस जारी करते हुए बैंक ने साफ़-साफ़ कहा कि फ़िलहाल उसके पास बैंक का ‘सिंबोलिक पजेशन’ है यानी बंगला अभी पूरी तरह उसके कब्जे में नहीं है. साथ ही यह भी कहा कि इच्छुक ख़रीदार 14 सितंबर को उसे देखने के लिए आ सकते हैं.

नीलामी की प्रक्रिया

अख़बारों में 19 अगस्त को बंगले को नीलाम करने का विज्ञापन छपा था, लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करने में एक दिन नहीं लगा। किसी भी संपत्ति को नीलाम करने की प्रक्रिया एक लम्बी होती है.

केशव खनेजा बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति 90 दिनों तक लोन की किस्त नहीं चुकाता है, तो 91वें दिन बैंक का ऑटोमेटिक सिस्टम उस खाते को एनपीए घोषित कर देता है।

खनेजा कहते हैं, “एनपीए घोषित होने के बाद व्यक्ति को सरफेसी एक्ट के सेक्शन 13(2) के तहत डिमांड नोटिस दिया जाता है और 60 दिनों का समय दिया जाता है कि बकाया पैसा जमा कर दें। अगर तब भी व्यक्ति पैसा नहीं देता है तो अगले दस दिनों के अंदर बैंक सरफेसी एक्ट के सेक्शन 13(4) के तहत पजेशन नोटिस देता है, जिसे वह संपत्ति पर चिपकाता है जो गिरवी रखी हुई है।”

पजेशन नोटिस एक तरह से प्रतीकात्मक होता है, इसका मतलब है कि अब इस संपत्ति पर बैंक का अधिकार होता है। बैंक बहुत बार डिस्ट्रिक मैजिस्ट्रेट या चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट के पास आवेदन करके फिजिकल पजेशन भी लेता है।

खनेजा कहते हैं, “नीलामी से पहले बैंक संपत्ति की क़ीमत फिर से तय करवाता है, क्योंकि एक्ट के मुताबिक संपत्ति की क़ीमत 12 महीनों से पुरानी नहीं होनी चाहिए। बिक्री नोटिस जारी करने से पहले भी बैंक क़र्ज़ चुकाने के लिए व्यक्ति को फिर से कहता है। तब भी पैसा न अदा करने पर बैंक ब्रिकी नोटिस जारी करता है और उसे संपत्ति पर चिपका देता है। आख़िर में फिर से ब्रिकी नोटिस को अख़बारों में प्रकाशित किया जाता है।”

इसका मतलब साफ़ है कि सनी देओल के जिस बंगले को बेचने का नोटिस बैंक ने 19 अगस्त को जारी किया था, उससे पहले बैंक की तरफ़ से कई बार चेतावनी दी जा चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद सनी देओल ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

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