कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो इस हफ्ते न्यूयॉर्क में मीडिया के सवालों का सामना कर रहे थे, और उनकी परिचित और भरोसेमंद मुस्कान सम्मेलन में उनसे पूछे गए सभी सवालों के साथ थी। इसमें कोई आश्चर्य नहीं था क्योंकि एक सप्ताह पहले उन्होंने भारत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे।

सोमवार को जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा, “कनाडा की एजेंसियों ने पुख्ता तौर पर पता किया है कि कनाडा की ज़मीन पर कनाडाई नागरिक की हत्या के पीछे भारत सरकार के एजेंटों का हाथ हो सकता है। हमारी ज़मीन पर हुई हत्या के पीछे विदेशी सरकार का होना अस्वीकार्य है और ये हमारी संप्रभुता का उल्लंघन है।”

लेकिन भारत ने कनाडा के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इस हत्या के साथ कोई नाता होने से इनकार किया है।

इस साल 18 जून को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में सिख नेता और खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर(45 साल) की एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

 

जस्टिन ट्रूडो से किए गए सवाल

धीरे-धीरे और बेहद संतुलित तरीके से बोलते हुए ट्रूडो ने कहा, “वो न तो किसी को भड़काना चाहते हैं और न ही कोई समस्या खड़ी करना चाहते हैं. हम उस विश्व व्यवस्था के लिए आवाज़ उठा रहे हैं जो नियमों पर आधारित है.”

कुछ पत्रकारों ने इस दौरान ट्रूडो से सवाल किया कि उनकी इस पूरी कोशिश में उनके सहयोगी कहां हैं? एक पत्रकार ने कहा, “अब तक देखा जाए तो आप अकेले ही दिख रहे हैं.”

जहां तक भारत से उलझने की बात हैं, अब तक जस्टिन ट्रूडो अकेले ही दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ रही अर्थव्यवस्था और आबादी के लिहाज़ से कनाडा से 35 गुना बड़े मुल्क के साथ दो-दो हाथ करते दिखाई दे रहे हैं.

जब से ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाए हैं तब से लेकर अब तक ‘फ़ाइव आइज़’ ख़ुफ़िया गठबंधन में शामिल उनके कुछ सहयोगी ही सार्वजनिक तौर पर सामने आए हैं.

उन्होंने मामले को गंभीर और चिंताजनक तो बताया है लेकिन ये नहीं कहा जा सकता कि वो खुल कर कनाडा के समर्थन में आए हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन   भारत

फ़ाइव आइज़ के सदस्यों ने क्या कहा?

‘फ़ाइव आइज़’ अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के बीच बना एक गठबंधन है जिसके तहत ख़ुफ़िया जानकारियां साझा की जाती हैं.

ब्रितानी विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने कहा, “हमारी सरकार कनाडा के आरोपों को बेहद गंभीरता से लेती है. हम सरकार की जांच का समर्थन करते हैं और सच्चाई बाहर आनी चाहिए.”

लेकिन कनाडा को बड़ी निराशा दक्षिण में मौजूद उसके पड़ोसी, यानी अमेरिका से हुई.

ये दोनों मुल्क बहुत अच्छे मित्र हैं लेकिन अमेरिका ने इस मुद्दे पर मुखर होकर नाराजगी जाहिर नहीं की, जैसे उम्मीद की जा रही थी.

इस पूरे मुद्दे पर न्यूज़ीलैंड ने अब तक कुछ नहीं कहा है.

जस्टिन ट्रूडो से किए गए सवाल

भारत का महत्व और अमेरिका का रुख़

संयुक्त राष्ट्र में जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने संबोधित किया तो उन्होंने भारत की आलोचना नहीं की बल्कि उन्होंने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर की तरफ इशारा करते हुए एक नया आर्थिक रास्ता दिखाने में भारत की भूमिका की सराहना की.

बाद में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने इस मामले को लेकर अमेरिका और कनाडा के बीच किसी तरह की “दरार” से इनकार किया और कहा कि अमेरिका, कनाडा के साथ लगातार संपर्क में है.

हालांकि सार्वजनिक तौर पर इस मामले में अमेरिका ने जो बयान दिए उनमें केवल “गंभीर चिंता” की बात की और और ये भी माना कि पश्चिमी मुल्कों के लिए भारत की अहमियत बढ़ती जा रही है.

जानकारों ने बीबीसी को बताया कि मौजूदा वक्त में रणनीतिक तौर पर भारत की बढ़ती अहमियत के सामने कनाडा के हित कमज़ोर नज़र आ रहे हैं. उनका मानना है कि यही कनाडा की परेशानी है.

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